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MAHARASHTRA NEWS : केंद्रीय बजट 'मिश्रित' और भविष्योन्मुखी, लेकिन महाराष्ट्र के लिए ठोस प्रावधानों की कमी: रवींद्र माणगावे

MAHARASHTRA NEWS : केंद्रीय बजट 'मिश्रित' और भविष्योन्मुखी, लेकिन महाराष्ट्र के लिए ठोस प्रावधानों की कमी: रवींद्र माणगावे

केंद्रीय बजट 'मिश्रित' और भविष्योन्मुखी, लेकिन महाराष्ट्र के लिए ठोस प्रावधानों की कमी: रवींद्र माणगावे
हापुड़ न्यूज ब्यूरो नेहाल हसन 
मुंबई । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रविंद्र माणगावे ने इसे वैश्विक बदलावों को ध्यान में रखने वाला एक 'मिश्रित' बजट करार दिया है।
माणगावे ने पत्रकारों से बातचीत में बजट के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उनके वक्तव्य के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
बजट की प्रमुख विशेषताएँ
 * निर्यात और व्यापार को प्रोत्साहन: बजट में व्यापार, उद्योग, सेवा क्षेत्र और कृषि निर्यातकों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (कार्य सुगमता) पर विशेष जोर दिया गया है।
 * विशिष्ट उद्योगों पर ध्यान: बायो-फार्मा, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, हस्तशिल्प और खेल जैसे क्षेत्रों को विशेष सहायता और प्रोत्साहन दिया गया है।
 * कौशल विकास और अनुसंधान: बजट में नवाचार (Research) और कौशल प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी गई है, जो 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
महाराष्ट्र चैंबर की मांग हुई पूरी
माणगावे ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आयकर प्रणाली में सुधार के लिए चैंबर द्वारा दिए गए सुझाव को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा:
> "हमने बजट-पूर्व सुझाव दिया था कि नए आयकर कानून से 'असेसमेंट ईयर' और 'प्रीवियस ईयर' के भ्रम को समाप्त किया जाए। सरकार ने इसे लागू कर दिया है, जो एक स्वागत योग्य कदम है।"
महाराष्ट्र की अपेक्षाएं और वास्तविकता
हालाँकि, माणगावे ने महाराष्ट्र के संदर्भ में कुछ निराशा भी व्यक्त की:
 * सीमित प्रावधान: अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र के लिए किसी बड़े या विशेष पैकेज का अभाव खटकता है।
 * संभावित लाभ: नई मेगा टेक्सटाइल नीति से इचलकरंजी और मालेगांव जैसे वस्त्र उद्योग केंद्रों को लाभ होगा। साथ ही, मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद रेलवे कॉरिडोर से कनेक्टिविटी और फार्मा क्षेत्र को गति मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष:
रवींद्र माणगावे के अनुसार, यह बजट एक अलग और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ पेश किया गया है, लेकिन महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक राज्य के लिए और अधिक ठोस वित्तीय प्रावधानों की उम्मीद थी

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